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परिवार के दैनिक उपयोग हेतु कुपोषणता को दूर करने के लिए एवं अतिरिक्त आमदनी के स्रोत का सृजन कर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निवास स्थान के समीप उपलब्ध भूमि पर फल, सब्जी एवं पुष्प की खेती कृषकों द्वारा कराया जाना ही सुराजी गांव योजना अंतर्गत बाड़ी की परिकल्पना का मुख्य आधार हैं। योजनान्तर्गत महिलाओं /महिला स्व-सहायकता समूह को तथा ग्राम के गरीब तबके और कमजोर वर्गों के परिवारों को जिनके घर पर बाड़ी के लिए जगह हैं, किन्तु बाड़ी की गतिविधि नहीं कर रहे है को योजना का लाभ दिये जाने हेतु चिन्हित कर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा हैं। बाड़ी से ग्रामीण परिवारों के अतिरिक्त आय में वृद्धि हो रहा हैं। भूमिहिनों.....

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